लोकसभा में बुधवार को बजट सत्र के आखिरी दिन सभी सांसदों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आखिरी भाषण में पांच सालों में सदन द्वारा किए गए कामों की सराहना की. इस मौके पर समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के उस बयान की काफी चर्चा रही जिसमें उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि वो चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बने. बुधवार का दिन 16वीं लोकसभा का आखिरी दिन भी था लिहाजा इस बात का विश्लेषण जरूरी है कि सदन 15वीं लोकसभा के मुकाबले कितना कामयाब रही.
लोकसभा यानी निचले सदन की कामयाबी नापने का सबसे पहले पैमाना होता है कि सदन द्वारा कितने बिल पास कराए गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं अपने आखिरी भाषण में इस बात का जिक्र किया कि सदन में बीते पांच साल के दौरान 200 से ज्याजा विधेयक पास हुए. अगर 15वीं लोकसभा यानी यूपीए-II के कार्यकाल की बात करें तो इस दौरान 181 विधेयक पास हुए. इस लिहाज से 15वीं लोकसभा के मुकाबले 16वीं लोकसभा में 10.49 फीसदी ज्यादा बिल पास हुए.
सदन की कार्यवाही में विभिन्न मुद्दों को लेकर व्यवधान और हंगामा भी आम बात है, ऐसे में सदन में स्थगन प्रस्ताव भी आते हैं. हालांकि इसे स्वीकार करना और इसपर चर्चा कराना स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में आता है. 16वीं में भी कई मुद्दों पर स्थगन प्रस्ताव आया लेकिन स्पीकर ने मात्र 1 स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार किया और इस पर चर्चा कराई. केंद्र की मोदी सरकार ने हंगामे के चलते सदन का समय जाया होने की वजह से 16 वीं लोकसभा में बड़ा बदलाव किया. जिससे तहत पहले प्रश्नकाल और बाद में शून्यकाल का प्रावधान रखा गया. क्योंकि अक्सर यह देखा जाता रहा है कि सदन की कार्यवाही शुरू होते ही शून्यकाल में सांसद हंगामा शुरू कर देते थे और पूरे दिन की कार्यवाही स्थगित हो जाती थी.
इस लिहाज 16वीं और 15वीं लोकसभा में शून्यकाल के दौरान उठे मुद्दों पर नजर डालें तो पता चलेगा 16वीं लोकसभा में शून्यकाल के दौरान जहां 6198 मामले उठाए गए तो वहीं 15वीं लोकसभा में 3316 मामले उठे. इस तरह दोनों लोकसभा कार्यकाल में लगभग दोगुने यानी 87 फीसदी का अंतर रहा. इसके पीछे की वजह शून्यकाल का ज्यादा समय के लिए चलना माना जा सकता है. यही नहीं, 377 नियम के तहत उठने वाले मुद्दों में भी 16.67 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई. जहां 15वीं लोकसभा में 377 नियम के तहत 4019 मामले उठे तो वहीं 16वीं लोकसभा में 4689 मामले उठे.
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव की बात करें तो 15वीं लोकसभा में कुल 37 प्रस्ताव आए जबकि 16वीं लोकसभा में 18 प्रस्ताव आए. 15वीं लोकसभा में सांसदों द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर विभिन्न मंत्रालयों द्वारा 598 बयान जारी किए गए तो वहीं 16वीं लोकसभा में 659 बयान दिए गए. तारांकित प्रश्नों की बात करें तो 15वीं लोकसभा में इस तरह के 650 प्रश्नों का जवाब दिया गया. जबकि 16वीं लोकसभा में 1169 तारांकित प्रश्नों का जवाब दिया गया. इस लिहाज से 16वीं लोकसभा में तारांकित प्रश्नों के जवाब की संख्या में 79.84 फीसदी बढ़ोतरी हुई. अगर गैर-तारांकित प्रश्नों की बात करें तो 15वीं लोकसभा में इसकी संख्या 73,160 रही जबकि 16वीं लोकसभा में गैर-तारांकित प्रश्नों की संख्या 73,405 रही.
सांसदों द्वारा उठाए गए किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर आधे घंटे की चर्चा कराने के मामले में 15वीं लोकसभा आगे रही. जहां 15वीं लोकसभा में 7 आधे घंटे की बहस हुई जबकि 16वीं लोकसभा में 5 आधे घंटे की चर्चा हुई. प्राइवेट मेंबर बिल की बात करें तो 16वीं विधानसभा में इसकी संख्या तीन गुना बढ़ी. जहां 15वीं लोकसभा में 372 प्राइवेट मेंबर्स बिल पेश किए गए तो वहीं 16वीं लोकसभा में 1117 प्राइवेट मेंबर्स बिल पेश हुए. इसके अलावा विभिन्न समितियों की रिपोर्ट के मामले में 15वीं लोकसभा में 652 रिपोर्ट और 16वीं लोकसभा में 715 रिपोर्ट पेश किए गए.
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