लोकसभा में बुधवार को बजट सत्र के आखिरी दिन सभी सांसदों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आखिरी भाषण में पांच सालों में सदन द्वारा किए गए कामों की सराहना की. इस मौके पर समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के उस बयान की काफी चर्चा रही जिसमें उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि वो चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बने. बुधवार का दिन 16वीं लोकसभा का आखिरी दिन भी था लिहाजा इस बात का विश्लेषण जरूरी है कि सदन 15वीं लोकसभा के मुकाबले कितना कामयाब रही.
लोकसभा यानी निचले सदन की कामयाबी नापने का सबसे पहले पैमाना होता है कि सदन द्वारा कितने बिल पास कराए गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं अपने आखिरी भाषण में इस बात का जिक्र किया कि सदन में बीते पांच साल के दौरान 200 से ज्याजा विधेयक पास हुए. अगर 15वीं लोकसभा यानी यूपीए-II के कार्यकाल की बात करें तो इस दौरान 181 विधेयक पास हुए. इस लिहाज से 15वीं लोकसभा के मुकाबले 16वीं लोकसभा में 10.49 फीसदी ज्यादा बिल पास हुए.
सदन की कार्यवाही में विभिन्न मुद्दों को लेकर व्यवधान और हंगामा भी आम बात है, ऐसे में सदन में स्थगन प्रस्ताव भी आते हैं. हालांकि इसे स्वीकार करना और इसपर चर्चा कराना स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में आता है. 16वीं में भी कई मुद्दों पर स्थगन प्रस्ताव आया लेकिन स्पीकर ने मात्र 1 स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार किया और इस पर चर्चा कराई. केंद्र की मोदी सरकार ने हंगामे के चलते सदन का समय जाया होने की वजह से 16 वीं लोकसभा में बड़ा बदलाव किया. जिससे तहत पहले प्रश्नकाल और बाद में शून्यकाल का प्रावधान रखा गया. क्योंकि अक्सर यह देखा जाता रहा है कि सदन की कार्यवाही शुरू होते ही शून्यकाल में सांसद हंगामा शुरू कर देते थे और पूरे दिन की कार्यवाही स्थगित हो जाती थी.
इस लिहाज 16वीं और 15वीं लोकसभा में शून्यकाल के दौरान उठे मुद्दों पर नजर डालें तो पता चलेगा 16वीं लोकसभा में शून्यकाल के दौरान जहां 6198 मामले उठाए गए तो वहीं 15वीं लोकसभा में 3316 मामले उठे. इस तरह दोनों लोकसभा कार्यकाल में लगभग दोगुने यानी 87 फीसदी का अंतर रहा. इसके पीछे की वजह शून्यकाल का ज्यादा समय के लिए चलना माना जा सकता है. यही नहीं, 377 नियम के तहत उठने वाले मुद्दों में भी 16.67 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई. जहां 15वीं लोकसभा में 377 नियम के तहत 4019 मामले उठे तो वहीं 16वीं लोकसभा में 4689 मामले उठे.
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव की बात करें तो 15वीं लोकसभा में कुल 37 प्रस्ताव आए जबकि 16वीं लोकसभा में 18 प्रस्ताव आए. 15वीं लोकसभा में सांसदों द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर विभिन्न मंत्रालयों द्वारा 598 बयान जारी किए गए तो वहीं 16वीं लोकसभा में 659 बयान दिए गए. तारांकित प्रश्नों की बात करें तो 15वीं लोकसभा में इस तरह के 650 प्रश्नों का जवाब दिया गया. जबकि 16वीं लोकसभा में 1169 तारांकित प्रश्नों का जवाब दिया गया. इस लिहाज से 16वीं लोकसभा में तारांकित प्रश्नों के जवाब की संख्या में 79.84 फीसदी बढ़ोतरी हुई. अगर गैर-तारांकित प्रश्नों की बात करें तो 15वीं लोकसभा में इसकी संख्या 73,160 रही जबकि 16वीं लोकसभा में गैर-तारांकित प्रश्नों की संख्या 73,405 रही.
सांसदों द्वारा उठाए गए किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर आधे घंटे की चर्चा कराने के मामले में 15वीं लोकसभा आगे रही. जहां 15वीं लोकसभा में 7 आधे घंटे की बहस हुई जबकि 16वीं लोकसभा में 5 आधे घंटे की चर्चा हुई. प्राइवेट मेंबर बिल की बात करें तो 16वीं विधानसभा में इसकी संख्या तीन गुना बढ़ी. जहां 15वीं लोकसभा में 372 प्राइवेट मेंबर्स बिल पेश किए गए तो वहीं 16वीं लोकसभा में 1117 प्राइवेट मेंबर्स बिल पेश हुए. इसके अलावा विभिन्न समितियों की रिपोर्ट के मामले में 15वीं लोकसभा में 652 रिपोर्ट और 16वीं लोकसभा में 715 रिपोर्ट पेश किए गए.
Wednesday, February 13, 2019
Wednesday, February 6, 2019
उत्तर प्रदेशः क्या है बच्चों के मैदान पर गोशाला बनाने का मामला
राज्य स्तर पर वॉलीबॉल खेल चुके क़ादिर ख़ान रोज़ाना अपने स्कूल के मैदान में अभ्यास करते हैं.
उनका सपना एक दिन देश की राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम में जगह बनाना है. अब उनका ये सपना अधूरा रह सकता है क्योंकि यूपी सरकार उनके स्कूल के मैदान में गोशाला बनाना चाहती है.
उत्तर प्रदेश में बलरामपुर ज़िले की तुलसीपुर तहसील के फ़ज़ल-ए-रहमानिया स्कूल के बच्चों के खेल के मैदान में गोशाला बनाने के प्रस्ताव पर अब विवाद हो गया है.
स्कूली बच्चों ने अपने खेलने के हक़ को लेकर प्रदर्शन किया है जबकि प्रशासन का कहना है कि जिस ज़मीन को गोशाला बनाने के लिए चयनित किया गया है वो सरकारी है.
मैदान में गोशाला बनने के बारे में क़ादिर ख़ान कहते हैं, "सिर्फ़ मैं ही नहीं और भी बच्चे इस मैदान में अभ्यास करते हैं. अगर यहां गोशाला बन गई तो हमारा खेलना बंद हो जाएगा. सब कुछ रुक जाएगा."
बलरामपुर के ज़िलाधिकारी कृष्णा करुणेश से जब इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "जिस ज़मीन को गोशाला बनाने के लिए चयनित किया गया है, वह सरकारी है. सरकार जैसे चाहे अपनी ज़मीन का इस्तेमाल कर सकती है."
फ़ज़ल-ए-रहमानिया इंटर कॉलेज एक अल्पसंख्यक स्कूल है, जिसे सरकार से मदद मिलती है. स्कूल की प्रबंध समिति से जुड़े शारिक़ रिज़वी कहते हैं, "सरकार जिस ज़मीन पर गोशाला बना रही है वह स्कूल प्रशासन को 1977 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने दी थी और इससे जुड़े दस्तावेज़ हमारे पास हैं."
वो कहते हैं, "अगर यहां गोशाला बन गई तो बच्चे के पास खेलने का मैदान नहीं रहेगा. हम सरकार के इस क़दम को अदालत में भी चुनौती देंगे. हमने फिलहाल प्रशासन से फिर से विचार करने की गुज़ारिश की है."
इस आरोप पर ज़िलाधिकारी कहते हैं, "ये सरकारी ज़मीन है जिसे हमने गोशाला के लिए चयनित किया है. यहां फ़ायर स्टेशन भी प्रस्तावित है. स्कूल प्रशासन चाहता है कि ये ज़मीन उनको मिल जाए लेकिन किसी भी शासनादेश के तहत ये हम उन्हें नहीं दे सकते हैं."
उन्होंने कहा, "हमारे ज़िले में अधिकतर इंटर कॉलेज सरकारी या सार्वजनिक भूमि के निकट बने हैं. ये इंटर कॉलेज भी सरकारी ज़मीन के पास है और स्कूल प्रशासन ने ज़मीन को घेरकर स्कूल में मिलाने की कोशिश भी की है. स्कूल के पास अपना अलग से खेल का मैदान है."
गोशाला खुलने से बच्चे के स्वास्थ्य और आसपास की स्वच्छता पर असर होने के सवाल पर ज़िलाधिकारी कहते हैं, "ये क़रीब एक एकड़ ज़मीन है. इसमें चरने का मैदान भी विकसित किया जाएगा और इसकी चारदिवारी करायी जाएगी. जानवर बाहर नहीं जाएंगे."
जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रशासन की प्राथमिकता स्कूल बच्चें से पहले गाय है तो उन्होंने कहा, "सवाल बच्चे के मैदान का नहीं है बल्कि स्कूल प्रशासन सरकारी ज़मीन स्कूल में मिलाना चाहता है."
उन्होंने कहा, "हमारी प्राथमिकता बच्चे ही हैं. अगर बच्चों के स्कूल का मैदान है तो हम वहां पर कोई दख़ल नहीं देंगे और पीछे हट जाएंगे. अगर आसपास बच्चे के पास खेलने के लिए और कोई सुरक्षित ज़मीन नहीं है तो हम पुनर्विचार करेंगे. मैंने स्थानीय एसडीएम से सभी तथ्यों का पता लगाने के लिए कहा है."
ये स्कूल नगर पंचायत पचपेड़वा के पास स्थित है और यहां गोशाला इसी नगर पंचायत के लिए बननी है. ज़मीन पर विवाद होने और बच्चों के प्रदर्शन के बाद अब नगर पंचायत ने भी यहां गोशाला न बनाने का प्रस्ताव पास करते हुए प्रशासन से कहीं और ज़मीन उपलब्ध करवाने की अपील की है.
नगर पंचायत चेयरमैन समन मलिक के पति मंज़ूर ख़ान ने बीबीसी से कहा, "हम नहीं चाहते कि बच्चों के खेलने के मैदान को लेकर गोशाला बनायी जाए. इससे लोगों में भी रोष फैल रहा है और बच्चों को भी दिक़्क़तें होंगी. हमने एक प्रस्ताव पास कर ज़िला प्रशासन से ज़मीन कहीं और आवंटित करने की अपील की है."
उनका सपना एक दिन देश की राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम में जगह बनाना है. अब उनका ये सपना अधूरा रह सकता है क्योंकि यूपी सरकार उनके स्कूल के मैदान में गोशाला बनाना चाहती है.
उत्तर प्रदेश में बलरामपुर ज़िले की तुलसीपुर तहसील के फ़ज़ल-ए-रहमानिया स्कूल के बच्चों के खेल के मैदान में गोशाला बनाने के प्रस्ताव पर अब विवाद हो गया है.
स्कूली बच्चों ने अपने खेलने के हक़ को लेकर प्रदर्शन किया है जबकि प्रशासन का कहना है कि जिस ज़मीन को गोशाला बनाने के लिए चयनित किया गया है वो सरकारी है.
मैदान में गोशाला बनने के बारे में क़ादिर ख़ान कहते हैं, "सिर्फ़ मैं ही नहीं और भी बच्चे इस मैदान में अभ्यास करते हैं. अगर यहां गोशाला बन गई तो हमारा खेलना बंद हो जाएगा. सब कुछ रुक जाएगा."
बलरामपुर के ज़िलाधिकारी कृष्णा करुणेश से जब इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "जिस ज़मीन को गोशाला बनाने के लिए चयनित किया गया है, वह सरकारी है. सरकार जैसे चाहे अपनी ज़मीन का इस्तेमाल कर सकती है."
फ़ज़ल-ए-रहमानिया इंटर कॉलेज एक अल्पसंख्यक स्कूल है, जिसे सरकार से मदद मिलती है. स्कूल की प्रबंध समिति से जुड़े शारिक़ रिज़वी कहते हैं, "सरकार जिस ज़मीन पर गोशाला बना रही है वह स्कूल प्रशासन को 1977 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने दी थी और इससे जुड़े दस्तावेज़ हमारे पास हैं."
वो कहते हैं, "अगर यहां गोशाला बन गई तो बच्चे के पास खेलने का मैदान नहीं रहेगा. हम सरकार के इस क़दम को अदालत में भी चुनौती देंगे. हमने फिलहाल प्रशासन से फिर से विचार करने की गुज़ारिश की है."
इस आरोप पर ज़िलाधिकारी कहते हैं, "ये सरकारी ज़मीन है जिसे हमने गोशाला के लिए चयनित किया है. यहां फ़ायर स्टेशन भी प्रस्तावित है. स्कूल प्रशासन चाहता है कि ये ज़मीन उनको मिल जाए लेकिन किसी भी शासनादेश के तहत ये हम उन्हें नहीं दे सकते हैं."
उन्होंने कहा, "हमारे ज़िले में अधिकतर इंटर कॉलेज सरकारी या सार्वजनिक भूमि के निकट बने हैं. ये इंटर कॉलेज भी सरकारी ज़मीन के पास है और स्कूल प्रशासन ने ज़मीन को घेरकर स्कूल में मिलाने की कोशिश भी की है. स्कूल के पास अपना अलग से खेल का मैदान है."
गोशाला खुलने से बच्चे के स्वास्थ्य और आसपास की स्वच्छता पर असर होने के सवाल पर ज़िलाधिकारी कहते हैं, "ये क़रीब एक एकड़ ज़मीन है. इसमें चरने का मैदान भी विकसित किया जाएगा और इसकी चारदिवारी करायी जाएगी. जानवर बाहर नहीं जाएंगे."
जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रशासन की प्राथमिकता स्कूल बच्चें से पहले गाय है तो उन्होंने कहा, "सवाल बच्चे के मैदान का नहीं है बल्कि स्कूल प्रशासन सरकारी ज़मीन स्कूल में मिलाना चाहता है."
उन्होंने कहा, "हमारी प्राथमिकता बच्चे ही हैं. अगर बच्चों के स्कूल का मैदान है तो हम वहां पर कोई दख़ल नहीं देंगे और पीछे हट जाएंगे. अगर आसपास बच्चे के पास खेलने के लिए और कोई सुरक्षित ज़मीन नहीं है तो हम पुनर्विचार करेंगे. मैंने स्थानीय एसडीएम से सभी तथ्यों का पता लगाने के लिए कहा है."
ये स्कूल नगर पंचायत पचपेड़वा के पास स्थित है और यहां गोशाला इसी नगर पंचायत के लिए बननी है. ज़मीन पर विवाद होने और बच्चों के प्रदर्शन के बाद अब नगर पंचायत ने भी यहां गोशाला न बनाने का प्रस्ताव पास करते हुए प्रशासन से कहीं और ज़मीन उपलब्ध करवाने की अपील की है.
नगर पंचायत चेयरमैन समन मलिक के पति मंज़ूर ख़ान ने बीबीसी से कहा, "हम नहीं चाहते कि बच्चों के खेलने के मैदान को लेकर गोशाला बनायी जाए. इससे लोगों में भी रोष फैल रहा है और बच्चों को भी दिक़्क़तें होंगी. हमने एक प्रस्ताव पास कर ज़िला प्रशासन से ज़मीन कहीं और आवंटित करने की अपील की है."
Monday, February 4, 2019
CBI विवाद: जब CJI बोले- सबूत मिले तो ऐसी कार्रवाई होगी कि पछताएंगे राजीव कुमार
पश्चिम बंगाल के चिटफंड केस ने पूरे देश की सियासत को गरमा दिया है. आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार से सीबीआई पूछताछ का मामला अब कोलकाता से निकलकर फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. जहां केस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को बड़ा झटका दिया है. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि वह यह सोच भी नहीं सकते कि एक आईपीएस अफसर सबूत नष्ट कर सकता है.
रविवार को बंगाल पुलिस ने कोलकाता में सीबीआई टीम को पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर रेड से रोकते हुए उन्हें ही हिरासत में ले लिया था. इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं. ममता पुलिस के रवैये के खिलाफ आज सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सीबीआई की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल से कोर्ट ने कहा कि आप सबूत नष्ट होने के संबंध में कोई दस्तावेज लेकर नहीं आए हैं, आप सिर्फ इल्जाम लगा रहे हैं कि सबूत नष्ट किए जा रहे हैं और उनसे छेड़छाड़ की जा रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब आप सबूत लेकर आएंगे तो कल सुबह 10.30 बजे इस मसले पर सुनवाई की जाएगी. कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सॉलिसिटर जनरल ने अपनी दलील में यह बताने का प्रयास किया कि देर रात तक इस संबंध में अर्जी ड्राफ्ट तैयार किया गया है और सीबीआई के पास कई अहम चीजें हैं. लेकिन कोर्ट ने उनकी यह दलील नहीं मानी और साफ कहा कि आप सबूत नष्ट किए जाने वाले सबूत लेकर आएं, तब कल सुबह इस मसले पर सुनवाई की जाएगी.
सबूत नष्ट करने वाली बात सोच भी नहीं सकते
कोर्ट ने एक तरफ जहां सीबीआई को झटका देते हुए उनसे सबूत नष्ट होने के सबूत मांगे, वहीं राजीव कुमार के संबंध में भी टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा, 'जहां तक आप यह कह रहे हैं कि IPS अफसर सबूत नष्ट कर रहे हैं, तो हम ऐसा सोच भी नहीं सकते. लेकिन फिर भी जब आप ऐसा कह रहे हैं तो आप सबूतों के साथ आइए, हम कल सुबह 10.30 बजे आपको सुनेंगे.'
हालांकि, इसके अलावा कोर्ट ने एक सख्त टिप्पणी भी की. कोर्ट ने कहा कि अगर सबूत होंगे तो पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार पर कार्रवाई होगी, और ऐसी कार्रवाई होगी कि वह पछताएंगे. वहीं, दूसरी तरफ कोर्ट रूम के बाहर जब सीबीआई अधिकारियों से आजतक संवाददाता ने सवाल किया कि आप खाली हाथ पहुंचे थे, इसके जवाब में अधिकारियों ने ऑफ रिकॉर्ड कहा कि उनसे पास काफी कुछ है.
बता दें कि पश्चिम बंगाल के शारदा चिट फंड केस की जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया था. इस जांच टीम के प्रमुख आईपीएस राजीव कुमार थे. अब वह कोलकाता के पुलिस कमिश्नर हैं और सीबीआई उन पर जांच के दौरान मिले अहम सबूत सीबीआई को न देने का आरोप लगा रही है, साथ सबूत नष्ट करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं. इसी मसले पर सोमवार को सुनवाई हुई और सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबूत नष्ट करने के सबूत लेकर आइए, कल सुनवाई होगी.
रविवार को बंगाल पुलिस ने कोलकाता में सीबीआई टीम को पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर रेड से रोकते हुए उन्हें ही हिरासत में ले लिया था. इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं. ममता पुलिस के रवैये के खिलाफ आज सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सीबीआई की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल से कोर्ट ने कहा कि आप सबूत नष्ट होने के संबंध में कोई दस्तावेज लेकर नहीं आए हैं, आप सिर्फ इल्जाम लगा रहे हैं कि सबूत नष्ट किए जा रहे हैं और उनसे छेड़छाड़ की जा रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब आप सबूत लेकर आएंगे तो कल सुबह 10.30 बजे इस मसले पर सुनवाई की जाएगी. कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सॉलिसिटर जनरल ने अपनी दलील में यह बताने का प्रयास किया कि देर रात तक इस संबंध में अर्जी ड्राफ्ट तैयार किया गया है और सीबीआई के पास कई अहम चीजें हैं. लेकिन कोर्ट ने उनकी यह दलील नहीं मानी और साफ कहा कि आप सबूत नष्ट किए जाने वाले सबूत लेकर आएं, तब कल सुबह इस मसले पर सुनवाई की जाएगी.
सबूत नष्ट करने वाली बात सोच भी नहीं सकते
कोर्ट ने एक तरफ जहां सीबीआई को झटका देते हुए उनसे सबूत नष्ट होने के सबूत मांगे, वहीं राजीव कुमार के संबंध में भी टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा, 'जहां तक आप यह कह रहे हैं कि IPS अफसर सबूत नष्ट कर रहे हैं, तो हम ऐसा सोच भी नहीं सकते. लेकिन फिर भी जब आप ऐसा कह रहे हैं तो आप सबूतों के साथ आइए, हम कल सुबह 10.30 बजे आपको सुनेंगे.'
हालांकि, इसके अलावा कोर्ट ने एक सख्त टिप्पणी भी की. कोर्ट ने कहा कि अगर सबूत होंगे तो पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार पर कार्रवाई होगी, और ऐसी कार्रवाई होगी कि वह पछताएंगे. वहीं, दूसरी तरफ कोर्ट रूम के बाहर जब सीबीआई अधिकारियों से आजतक संवाददाता ने सवाल किया कि आप खाली हाथ पहुंचे थे, इसके जवाब में अधिकारियों ने ऑफ रिकॉर्ड कहा कि उनसे पास काफी कुछ है.
बता दें कि पश्चिम बंगाल के शारदा चिट फंड केस की जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया था. इस जांच टीम के प्रमुख आईपीएस राजीव कुमार थे. अब वह कोलकाता के पुलिस कमिश्नर हैं और सीबीआई उन पर जांच के दौरान मिले अहम सबूत सीबीआई को न देने का आरोप लगा रही है, साथ सबूत नष्ट करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं. इसी मसले पर सोमवार को सुनवाई हुई और सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबूत नष्ट करने के सबूत लेकर आइए, कल सुनवाई होगी.
Friday, February 1, 2019
पांच साल का कामकाज देखा है, मोदी की मानसिकता में कोई खोट नहीं : बालकृष्ण
पतंजलि ग्रुप के अध्यक्ष आचार्य बालकृष्ण का मानना है कि इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच साल की सरकार में कुछ अच्छे काम शुरू हुए हैं। मोदी का इंटेंशन सही है, उनकी मानसिकता में खोट नहीं है। बाबा रामदेव ने 2014 के आम चुनाव के दौरान मोदी के लिए कैंपेन किया था, अब लगता है कि ठीक किया।
गुरुवार देर शाम 8.30 बजे भोपाल पहुंचे बालकृष्ण ने ‘भास्कर’ से बातचीत की। इसके बाद वे मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी निवेश की संभावनाओं और अपेक्षित सहयोग को लेकर मिले। रीवा में अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय की ओर से आचार्य बालकृष्ण को आज डी-लिट की उपाधि से नवाजा जाएगा। उनसे बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल - पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वर्तमान पीएम मोदी की नीति में क्या अंतर देखते हैं?
जवाब : मैं नीति नहीं देखता। काम करता हूं। उसी में जुटा रहता हूं। नीति कैसी और किसकी है यह देखने का काम देश और दुनिया का है।
सवाल - आपने और बाबा रामदेव ने मोदी के स्वच्छता अभियान को प्रमोट किया है, क्या लगता है वह सफल हो गया?
जवाब : यह कठिन काम था, लेकिन मानसकिता का ही बन जाना बड़ी बात है। यह बन गई है अब परिणाम तक पहुंचने में दिक्कत नहीं होगी।
सवाल - मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से बेहतर कौन होगा? क्या निवेश का वातारण बनेगा?
जवाब : शायद आपको यह जानकारी नहीं होगी कि बाबा रामदेव का योग का पहला आयोजन मप्र में कमलनाथ जी ने ही करवाया था। मेरा तो उनसे संपर्क नहीं है, लेकिन बाबा रामदेव अच्छे से जानते हैं। शिवराज सिंह ने भी सहयोग किया, अभी भी उम्मीद है।
सवाल - क्या आपको लगता है कि बाबा रामदेव को भी भारत-रत्न दिया जाना चाहिए?
जवाब : आयुर्वेद को आगे बढ़ाने में उनका योगदान किसी से छिपा नहीं है। देश को उन्होंने गौरव दिलाया। उनके व्यक्तित्व की गहराई को मैं ज्यादा समझता हूं। खाते-पीते, सोते-जागते वे देश के बारे में सोचते हैं। उन्होंने जीवन लगा दिया। उनको यह सम्मान देते हैं तो देश का गौरव ही बढ़ेगा।
सवाल - क्या मप्र में और निवेश करेंगे, इंदौर की इकाई से उत्पादन कब तक होगा?
जवाब : इंदौर में एक हजार टन गेहूं की प्रोसेसिंग होने जा रही है जो वृहद है। नागपुर में संतरे की प्रोसेसिंग इकाई लगी है। शाजापुर का बी व सी ग्रेड का पूरा संतरा नागपुर ले जाएंगे। जहां तक नए निवेश की बात है तो कच्चे माल की उपलब्धता का सर्वे करा रहे हैं। जल्द ही आगे निर्णय लेंगे।
गुरुवार देर शाम 8.30 बजे भोपाल पहुंचे बालकृष्ण ने ‘भास्कर’ से बातचीत की। इसके बाद वे मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी निवेश की संभावनाओं और अपेक्षित सहयोग को लेकर मिले। रीवा में अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय की ओर से आचार्य बालकृष्ण को आज डी-लिट की उपाधि से नवाजा जाएगा। उनसे बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल - पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वर्तमान पीएम मोदी की नीति में क्या अंतर देखते हैं?
जवाब : मैं नीति नहीं देखता। काम करता हूं। उसी में जुटा रहता हूं। नीति कैसी और किसकी है यह देखने का काम देश और दुनिया का है।
सवाल - आपने और बाबा रामदेव ने मोदी के स्वच्छता अभियान को प्रमोट किया है, क्या लगता है वह सफल हो गया?
जवाब : यह कठिन काम था, लेकिन मानसकिता का ही बन जाना बड़ी बात है। यह बन गई है अब परिणाम तक पहुंचने में दिक्कत नहीं होगी।
सवाल - मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से बेहतर कौन होगा? क्या निवेश का वातारण बनेगा?
जवाब : शायद आपको यह जानकारी नहीं होगी कि बाबा रामदेव का योग का पहला आयोजन मप्र में कमलनाथ जी ने ही करवाया था। मेरा तो उनसे संपर्क नहीं है, लेकिन बाबा रामदेव अच्छे से जानते हैं। शिवराज सिंह ने भी सहयोग किया, अभी भी उम्मीद है।
सवाल - क्या आपको लगता है कि बाबा रामदेव को भी भारत-रत्न दिया जाना चाहिए?
जवाब : आयुर्वेद को आगे बढ़ाने में उनका योगदान किसी से छिपा नहीं है। देश को उन्होंने गौरव दिलाया। उनके व्यक्तित्व की गहराई को मैं ज्यादा समझता हूं। खाते-पीते, सोते-जागते वे देश के बारे में सोचते हैं। उन्होंने जीवन लगा दिया। उनको यह सम्मान देते हैं तो देश का गौरव ही बढ़ेगा।
सवाल - क्या मप्र में और निवेश करेंगे, इंदौर की इकाई से उत्पादन कब तक होगा?
जवाब : इंदौर में एक हजार टन गेहूं की प्रोसेसिंग होने जा रही है जो वृहद है। नागपुर में संतरे की प्रोसेसिंग इकाई लगी है। शाजापुर का बी व सी ग्रेड का पूरा संतरा नागपुर ले जाएंगे। जहां तक नए निवेश की बात है तो कच्चे माल की उपलब्धता का सर्वे करा रहे हैं। जल्द ही आगे निर्णय लेंगे।
Thursday, January 24, 2019
बिहार में RJD नेता रघुवर राय की हत्या, तेजस्वी बोले- गुंडों को संभालिए नीतीश जी
बिहार के समस्तीपुर में विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता को निशाना बनाया गया है. आरजेडी नेता रघुवर राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई है. आरजेडी नेता की हत्या से इलाके में माहौल गरमा गया है. आक्रोशित लोगों ने सड़क पर जाम लगा दिया है.
घटना समस्तीपुर के कल्याणपुर की है. जहां आरजेडी के प्रदेश महासचिव और पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष रघुवर राय को गोली मार दी गई. गोली लगने के बाद उन्हें तुरंत दरभंगा के निजी अस्पताल में रेफर किया गया. लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका.
मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे रघुवर राय
समस्तीपुर एसपी हरप्रीत कौर ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि हर दिन की तरह बुधवार सुबह भी रघुवार राय कल्याणपुर स्थित अपने आवास से मॉर्निंग वॉक के लिए बाहर निकले थे. मौसम खराब होने की वजह से आज वह कुछ देरी से वॉक के लिए निकले.
वॉक के दौरान एक सुनसान जगह पर घात लगाए बदमाशों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी. गोली मारते ही हमलावर मौके से फरार हो गए. जबकि बुरी तरह जख्मी आरजेडी नेता को उनके समर्थक सीधे दरभंगा लेकर गए. जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.
हत्या से आक्रोश
इस घटना से इलाके में काफी आक्रोश देखा जा रहा है. गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर अपना विरोध जताया. वहीं, आरजेडी विधायक शाहीन ने भी घटना पर दुख जताया.
तेजस्वी बोले- गुंडों को संभालिए नीतीश जी
अपनी पार्टी के नेता की हत्या पर बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी विधायक तेजस्वी यादव ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बिहार में बढ़ते अपराध पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा है. तेजस्वी ने कहा है कि नीतीश कुमार जी सत्ता संरक्षित गुंडों को संभालिए.
तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया, 'नीतीश कुमार जी, सत्ता संरक्षित गुंडों को संभालिए. किस बात और किस काम के गृहमंत्री बने कुर्सी से चिपक कर बैठे हैं? आपके द्वारा संरक्षित अपराधी रालोसपा और राजद के नेताओं की चुन-चुन कर हत्या कर रहे हैं, लेकिन आजतक आपकी जुबान का ताला नहीं खुला है. घोर निंदनीय..'
बता दें कि पिछले साल ही उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से जुड़े एक नेता की भी हत्या कर दी गई थी. कुशवाहा अब तेजस्वी यादव के साथ आ गए हैं. ऐसे में उन्होंने दोनों घटनाओं को लेकर नीतीश कुमार सरकार को घेरा है. आरजेडी नेता के अलावा बीती रात विभूतिपुर में एक किसान की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई.
घटना समस्तीपुर के कल्याणपुर की है. जहां आरजेडी के प्रदेश महासचिव और पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष रघुवर राय को गोली मार दी गई. गोली लगने के बाद उन्हें तुरंत दरभंगा के निजी अस्पताल में रेफर किया गया. लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका.
मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे रघुवर राय
समस्तीपुर एसपी हरप्रीत कौर ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि हर दिन की तरह बुधवार सुबह भी रघुवार राय कल्याणपुर स्थित अपने आवास से मॉर्निंग वॉक के लिए बाहर निकले थे. मौसम खराब होने की वजह से आज वह कुछ देरी से वॉक के लिए निकले.
वॉक के दौरान एक सुनसान जगह पर घात लगाए बदमाशों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी. गोली मारते ही हमलावर मौके से फरार हो गए. जबकि बुरी तरह जख्मी आरजेडी नेता को उनके समर्थक सीधे दरभंगा लेकर गए. जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.
हत्या से आक्रोश
इस घटना से इलाके में काफी आक्रोश देखा जा रहा है. गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर अपना विरोध जताया. वहीं, आरजेडी विधायक शाहीन ने भी घटना पर दुख जताया.
तेजस्वी बोले- गुंडों को संभालिए नीतीश जी
अपनी पार्टी के नेता की हत्या पर बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी विधायक तेजस्वी यादव ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बिहार में बढ़ते अपराध पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा है. तेजस्वी ने कहा है कि नीतीश कुमार जी सत्ता संरक्षित गुंडों को संभालिए.
तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया, 'नीतीश कुमार जी, सत्ता संरक्षित गुंडों को संभालिए. किस बात और किस काम के गृहमंत्री बने कुर्सी से चिपक कर बैठे हैं? आपके द्वारा संरक्षित अपराधी रालोसपा और राजद के नेताओं की चुन-चुन कर हत्या कर रहे हैं, लेकिन आजतक आपकी जुबान का ताला नहीं खुला है. घोर निंदनीय..'
बता दें कि पिछले साल ही उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से जुड़े एक नेता की भी हत्या कर दी गई थी. कुशवाहा अब तेजस्वी यादव के साथ आ गए हैं. ऐसे में उन्होंने दोनों घटनाओं को लेकर नीतीश कुमार सरकार को घेरा है. आरजेडी नेता के अलावा बीती रात विभूतिपुर में एक किसान की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई.
Tuesday, January 15, 2019
मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह की लड़कियां कहां और कैसी हैं? - ग्राउंड रिपोर्ट
मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह कांड को उजागर हुए अब सात महीने से अधिक का वक्त हो चला है और ऐसे कई सवाल जवाब की तलाश में अब भी भटक रहे हैं.
शेल्टर होम की वो लड़कियां कहां गईं जिनके बारे में पीमसीएच में हुई मेडिकल जांच के बाद बिहार की मीडिया में 'गर्भवती होने की पुष्टि ' होने की ख़बरें छपी थीं?
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ (TISS) की वो रिपोर्ट जिसमें वहां रहने वाली बच्चियों के साथ यौन दुर्व्यवहार से लेकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की जानकारी दी गई थी, पिछले साल 26 मई को समाज कल्याण विभाग के निदेशक तक पहुंची.
विभाग द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए 29 मई 2018 को बालिका गृह को खाली करा लिया गया और वहां रहने वाली सभी 44 बच्चियों को बेहतर देखभाल और सुरक्षा मुहैया कराने के लिए राज्य के दूसरे शेल्टर होम में शिफ़्ट कर दिया गया.
इनमें से 14 बच्चियों को बालिका गृह मधुबनी में, 14 को बालिका गृह मोकामा में और बाकी 16 लड़कियों को बालिका गृह, पटना भेजा गया था.
31 मई 2018 को समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन सहायक निदेशक दिवेश शर्मा के बयान के आधार पर मुज़फ़्फ़रपुर महिला थाने में मामले में पहला एफ़आईआर दर्ज हुआ और पुलिस इसकी जांच में लग गई.
जो बातें अब तक मालूम हैं...
मुज़फ़्फ़रपुर पुलिस ने 11 नामजद अभियुक्तों में से 10 को तुरंत गिरफ़्तार भी कर लिया. जिसमें मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर भी शामिल थे.
बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए और निष्पक्ष जांच का हवाला देकर बिहार सरकार ने बालिका गृह कांड की जांच का जिम्मा सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इनवेस्टिगेशन यानी सीबीआई को दे दिया.
सीबीआई ने 19 दिसंबर को विशेष पॉक्सो कोर्ट में मामले की चार्जशीट दायर कर दी है.
जिसमें मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह में रहने वाली 44 में से 33 लड़कियों समेत कुल 102 गवाहों के बयानों और उनसे लिए गए साक्ष्यों के आधार पर 21 अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आरोप तय किए गए हैं.
सीबीआई की चार्जशीट कहती है कि इस मामले में अनुंसधान अभी भी जारी है. मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह कांड का यह अब तक का सार है.
वैसे तो इन सात महीनों के दौरान इसके अलावा भी मामले में बहुत कुछ हुआ है. फिर चाहे वो समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा का इस्तीफ़ा हो, या हाई कोर्ट से मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह मामले से संबंधित ख़बरों के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक.
सुप्रीम कोर्ट से रोक हटाने का आदेश और अब सीबीआई की चार्जशीट के हवाले से बच्चियों पर होने वाली यातनाओं की कहानी अख़बारों की सुर्खियां बनी हुई हैं.
सवाल जिनके जवाब नहीं...
लेकिन, इन सात महीनों के दौरान एक बार भी ये बात नहीं उठी कि सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार उन 'सतायी हुई बच्चियों' का इन दिनों में क्या हुआ? वे अभी किस हाल में हैं?
क्या वे बच्चियां यातना से भरे उन दिनों को अब भूल चुकी हैं? उन बच्चियों का क्या हुआ जिनके 'गर्भवती होने की पुष्टि' की ख़बरें तब अख़बारों की हेडलाइन बनी थीं और आज भी इंटरनेट पर इसी हेडिंग के साथ उपलब्ध हैं? साथ ही सवाल ये भी कि सरकार ने उसके बाद उन 44 पीड़ित बच्चियों के लिया क्या किया?
मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह कांड के ऐसे ही तमाम अनसुलझे सवालों के साथ 10 जनवरी, दिन गुरुवार की सुबह क़रीब 11 बजे हम बालिका गृह, मधुबनी के मेन गेट के सामने खड़े थे.
एकदम से घने बसावट वाले मधुबनी के वार्ड 17 में स्थित सूरतगंज मोहल्ले की एक गली में 'हुसैन मंजिल' के मुख्य गेट पर लिखा था, 'बालिका गृह मधुबनी, सौजन्य- राज्य एवं बाल विकास संरक्षण समिति समाज कल्याण विभाग, बिहार पटना, संचालक- परिहार सेवा संस्थान.'
मधुबनी का ये वही बालिकागृह है जिसमें मुज़फ़्फ़रपुर की पीड़ित 14 बच्चियों को लाया गया था.
सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में बिहार सरकार ने जवाब दिया है, "पीड़ित बच्चियों की बेहतर देखभाल और सुरक्षा के लिए मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह से हटाकर मधुबनी के बालिका गृह ले जाया गया है."
मधुबनी के सूरतगंज की पतली और संकरी गली में, जिसके दोनों तरफ मकान एक दूसरे से बिल्कुल सटकर बने थे, बजबजाती नाली और चारो तरफ़ गंदगी का अंबार लगा था और सबसे अव्वल तो ये कि बालिका गृह के पीछे का घर और गृह के कैंपस की दीवार एक था.
इसके पहले की रिपोर्टिंग के दौरान मैं मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह भी जा चुका था. जिसको लेकर ये सवाल उठे थे कि आखिर सरकार ने ब्रजेश ठाकुर को वैसी जगह पर, वैसे परिवेश में और वैसी संरचना के साथ बालिका गृह चलाने की अनुमति कैसे मिल गई?
बालिका गृह मधुबनी के गेट पर खड़ा मैं कुछ देर यही सोचता रहा कि मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह से बेहतर देखभाल और सुरक्षा के नाम पर बच्चियों को यहां क्यों शिफ़्ट किया गया जबकि किसी नज़र से यह शेल्टर होम के लिए बनाए गए नियम-क़ायदों का पालन करता हुआ नहीं दिख रहा था. इसे एनजीओ परिहार सेवा संस्थान चला रही है.
यहां से मुज़फ़्फ़रपुर की एक पीड़िता लड़की के लापता होने का मामला भी दर्ज हुआ, जिसका आजतक कोई पता नहीं चल सका.
वहां मौजूद एक केयर टेकर महिला कर्मी ने हमसे पूछा, "किससे परमिशन लेकर आए हैं? अंदर आने के लिए आपको या तो बाल संरक्षण इकाई या फिर डीएम से परमिशन लेना होगा. और माफ़ करिएगा, हम कोई बात नहीं कर पाएंगे, यहां की सुप्रिटेंडेंट अभी नहीं हैं. आप उनसे फ़ोन पर बात कर लीजिए."
शेल्टर होम की वो लड़कियां कहां गईं जिनके बारे में पीमसीएच में हुई मेडिकल जांच के बाद बिहार की मीडिया में 'गर्भवती होने की पुष्टि ' होने की ख़बरें छपी थीं?
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ (TISS) की वो रिपोर्ट जिसमें वहां रहने वाली बच्चियों के साथ यौन दुर्व्यवहार से लेकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की जानकारी दी गई थी, पिछले साल 26 मई को समाज कल्याण विभाग के निदेशक तक पहुंची.
विभाग द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए 29 मई 2018 को बालिका गृह को खाली करा लिया गया और वहां रहने वाली सभी 44 बच्चियों को बेहतर देखभाल और सुरक्षा मुहैया कराने के लिए राज्य के दूसरे शेल्टर होम में शिफ़्ट कर दिया गया.
इनमें से 14 बच्चियों को बालिका गृह मधुबनी में, 14 को बालिका गृह मोकामा में और बाकी 16 लड़कियों को बालिका गृह, पटना भेजा गया था.
31 मई 2018 को समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन सहायक निदेशक दिवेश शर्मा के बयान के आधार पर मुज़फ़्फ़रपुर महिला थाने में मामले में पहला एफ़आईआर दर्ज हुआ और पुलिस इसकी जांच में लग गई.
जो बातें अब तक मालूम हैं...
मुज़फ़्फ़रपुर पुलिस ने 11 नामजद अभियुक्तों में से 10 को तुरंत गिरफ़्तार भी कर लिया. जिसमें मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर भी शामिल थे.
बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए और निष्पक्ष जांच का हवाला देकर बिहार सरकार ने बालिका गृह कांड की जांच का जिम्मा सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इनवेस्टिगेशन यानी सीबीआई को दे दिया.
सीबीआई ने 19 दिसंबर को विशेष पॉक्सो कोर्ट में मामले की चार्जशीट दायर कर दी है.
जिसमें मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह में रहने वाली 44 में से 33 लड़कियों समेत कुल 102 गवाहों के बयानों और उनसे लिए गए साक्ष्यों के आधार पर 21 अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आरोप तय किए गए हैं.
सीबीआई की चार्जशीट कहती है कि इस मामले में अनुंसधान अभी भी जारी है. मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह कांड का यह अब तक का सार है.
वैसे तो इन सात महीनों के दौरान इसके अलावा भी मामले में बहुत कुछ हुआ है. फिर चाहे वो समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा का इस्तीफ़ा हो, या हाई कोर्ट से मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह मामले से संबंधित ख़बरों के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक.
सुप्रीम कोर्ट से रोक हटाने का आदेश और अब सीबीआई की चार्जशीट के हवाले से बच्चियों पर होने वाली यातनाओं की कहानी अख़बारों की सुर्खियां बनी हुई हैं.
सवाल जिनके जवाब नहीं...
लेकिन, इन सात महीनों के दौरान एक बार भी ये बात नहीं उठी कि सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार उन 'सतायी हुई बच्चियों' का इन दिनों में क्या हुआ? वे अभी किस हाल में हैं?
क्या वे बच्चियां यातना से भरे उन दिनों को अब भूल चुकी हैं? उन बच्चियों का क्या हुआ जिनके 'गर्भवती होने की पुष्टि' की ख़बरें तब अख़बारों की हेडलाइन बनी थीं और आज भी इंटरनेट पर इसी हेडिंग के साथ उपलब्ध हैं? साथ ही सवाल ये भी कि सरकार ने उसके बाद उन 44 पीड़ित बच्चियों के लिया क्या किया?
मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह कांड के ऐसे ही तमाम अनसुलझे सवालों के साथ 10 जनवरी, दिन गुरुवार की सुबह क़रीब 11 बजे हम बालिका गृह, मधुबनी के मेन गेट के सामने खड़े थे.
एकदम से घने बसावट वाले मधुबनी के वार्ड 17 में स्थित सूरतगंज मोहल्ले की एक गली में 'हुसैन मंजिल' के मुख्य गेट पर लिखा था, 'बालिका गृह मधुबनी, सौजन्य- राज्य एवं बाल विकास संरक्षण समिति समाज कल्याण विभाग, बिहार पटना, संचालक- परिहार सेवा संस्थान.'
मधुबनी का ये वही बालिकागृह है जिसमें मुज़फ़्फ़रपुर की पीड़ित 14 बच्चियों को लाया गया था.
सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में बिहार सरकार ने जवाब दिया है, "पीड़ित बच्चियों की बेहतर देखभाल और सुरक्षा के लिए मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह से हटाकर मधुबनी के बालिका गृह ले जाया गया है."
मधुबनी के सूरतगंज की पतली और संकरी गली में, जिसके दोनों तरफ मकान एक दूसरे से बिल्कुल सटकर बने थे, बजबजाती नाली और चारो तरफ़ गंदगी का अंबार लगा था और सबसे अव्वल तो ये कि बालिका गृह के पीछे का घर और गृह के कैंपस की दीवार एक था.
इसके पहले की रिपोर्टिंग के दौरान मैं मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह भी जा चुका था. जिसको लेकर ये सवाल उठे थे कि आखिर सरकार ने ब्रजेश ठाकुर को वैसी जगह पर, वैसे परिवेश में और वैसी संरचना के साथ बालिका गृह चलाने की अनुमति कैसे मिल गई?
बालिका गृह मधुबनी के गेट पर खड़ा मैं कुछ देर यही सोचता रहा कि मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह से बेहतर देखभाल और सुरक्षा के नाम पर बच्चियों को यहां क्यों शिफ़्ट किया गया जबकि किसी नज़र से यह शेल्टर होम के लिए बनाए गए नियम-क़ायदों का पालन करता हुआ नहीं दिख रहा था. इसे एनजीओ परिहार सेवा संस्थान चला रही है.
यहां से मुज़फ़्फ़रपुर की एक पीड़िता लड़की के लापता होने का मामला भी दर्ज हुआ, जिसका आजतक कोई पता नहीं चल सका.
वहां मौजूद एक केयर टेकर महिला कर्मी ने हमसे पूछा, "किससे परमिशन लेकर आए हैं? अंदर आने के लिए आपको या तो बाल संरक्षण इकाई या फिर डीएम से परमिशन लेना होगा. और माफ़ करिएगा, हम कोई बात नहीं कर पाएंगे, यहां की सुप्रिटेंडेंट अभी नहीं हैं. आप उनसे फ़ोन पर बात कर लीजिए."
Monday, January 14, 2019
अश्वमेध में घोड़े कम पड़ जाएं तो खच्चर नहीं लाते- कुमार विश्वास की व्यंग्य शृंखला
कुंभ देख लिया महाकवि?’, हाजी पंडित ने चमकते हुए पूछा। मैंने हाजी को लताड़ा, ‘अमां हाजी, कैसे धर्म प्रबंधक हो! अभी कुंभ शुरू कहां हुआ है? हां, राजनीतिक पंडितों ने ज़रूर अभी से यूपी की अस्सी सीटों के जुगाड़ में डुबकी लगानी शुरू कर दी है। महागठबंधन की छपाक-छपाक से लेकर अपने दल तक की छपर-छपर तक तरह-तरह की आवाज़ें गूंज रही हैं। कुछ स्विमिंग पूल के रसिया गंगाजी में कूद तो गए हैं, लेकिन असली इनफिनिटी पूल का विस्तार देखते ही गुडुप-गुडुप करने लगे हैं। अपनी लहर का दावा करने वाले कई पुराने लहरिये गंगा के बुलावे पर गंगाजी की धार में ही तख़्ती ढूंढते नज़र आ रहे हैं।’
हाजी ने पहली बार मुझे इतना सारा एक बार में बोलते हुए सुना था। बोले, ‘वो तो ठीक है महाकवि! लेकिन एक कुंभ तो दुबई में हो भी लिया।’ ‘तुम भी हाजी कभी-कभी भावनाओं में बह जाते हो! इवेंट मैनेजमेंट और राजनीति में फ़र्क़ होता है।’ हाजी को राजनीति सिखाने वाला मैं कौन होता था। सो हाजी ने पलटवार किया, ‘अच्छा! और जैसे तुमने पिछले पांच साल में देखा ही नहीं है कि इवेंट मैनेजमेंट के सहारे पटरी से उतरी राजनीति कैसे चलाई जाती है!’
मैंने भी हाजी से कम न पड़ने का इरादा कर लिया था, ‘पर उनकी भी कहां चल रही है हाजी! भाई लोगों को लगा कि एक साथ कई घोड़े निकाल दो तो विश्व-विजय जल्दी हो जाएगी। लेकिन अश्वमेध में घोड़े कम पड़ जाने का मतलब यह थोड़ी है कि खच्चरों को काम पर लगा दो! अब देख लो, पांच राज्यों में मिट्टी हुआ पथ जहां-तहां रुका पड़ा है!’ हाजी को बात पसंद आई। उन्होंने जोड़ा, ‘रथ तो रुका सो रुका महाकवि, मज़े की बात तो ये है कि बजाए घोड़े और खच्चर पहचानने के, बंदे लकड़ी के पहिये में पंक्चर ढूंढने में लगे हैं। मौके का फ़ायदा उठाकर विपक्ष भी मुहल्ले के बदमाश बच्चों की तरह परेशान रथाधीश पर कभी रफाल, तो कभी सीबीआई, तो कभी एससी-एसटी एक्ट के गोले बना-बनाकर फेंक रहा है।’
मैंने कहा, ‘ऐसे में तो भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल है हाजी। उधर बुआ-बबुआ इकठ्ठे हो गए, इधर कांग्रेस ने तो लगता है संजीवनी सूंघ ली है। शिव सेना ने तो लंबी वाली जीभ चिढ़ा दी। अब?’ हाजी बोले, ‘अब ये सिल्वर लाइनिंग इन द क्लाउड ढूंढ रहे हैं महाकवि- डूबते को तिनके का सहारा। हद तो ये है कि कल एक भाजपाई पूरे कॉन्फिडेंस से बोल रहा था कि देख लेना ममता दीदी हमारे साथ आएंगी।
मैंने पूछा कि ऐसा क्यों लगता है, तो बोला कि कल दीदी ने कहा कि सीबीआई मामले में मोदी जी ने लक्ष्मण रेखा पार कर ली है। लक्ष्मण का नाम लेकर ममता दीदी निश्चित रूप से राम मंदिर मामले में हमारा साथ देने का इशारा दे रही हैं।’ मैंने हंसी और आश्चर्य के मिश्रित भाव में पूछा, ‘हें! ये कौन सी बात हुई?’ हाजी भी हंसे। बोले, ‘ऐसा है महाकवि! जहां लॉजिक ख़त्म होता है, वहां से मैजिक शुरू हो जाता है। तो अब भाई साहब मैजिक की तलाश में हैं। उम्मीद पर दुनिया क़ायम है। बक़ौल हबीब सिद्दीक़ी,
हाजी ने पहली बार मुझे इतना सारा एक बार में बोलते हुए सुना था। बोले, ‘वो तो ठीक है महाकवि! लेकिन एक कुंभ तो दुबई में हो भी लिया।’ ‘तुम भी हाजी कभी-कभी भावनाओं में बह जाते हो! इवेंट मैनेजमेंट और राजनीति में फ़र्क़ होता है।’ हाजी को राजनीति सिखाने वाला मैं कौन होता था। सो हाजी ने पलटवार किया, ‘अच्छा! और जैसे तुमने पिछले पांच साल में देखा ही नहीं है कि इवेंट मैनेजमेंट के सहारे पटरी से उतरी राजनीति कैसे चलाई जाती है!’
मैंने भी हाजी से कम न पड़ने का इरादा कर लिया था, ‘पर उनकी भी कहां चल रही है हाजी! भाई लोगों को लगा कि एक साथ कई घोड़े निकाल दो तो विश्व-विजय जल्दी हो जाएगी। लेकिन अश्वमेध में घोड़े कम पड़ जाने का मतलब यह थोड़ी है कि खच्चरों को काम पर लगा दो! अब देख लो, पांच राज्यों में मिट्टी हुआ पथ जहां-तहां रुका पड़ा है!’ हाजी को बात पसंद आई। उन्होंने जोड़ा, ‘रथ तो रुका सो रुका महाकवि, मज़े की बात तो ये है कि बजाए घोड़े और खच्चर पहचानने के, बंदे लकड़ी के पहिये में पंक्चर ढूंढने में लगे हैं। मौके का फ़ायदा उठाकर विपक्ष भी मुहल्ले के बदमाश बच्चों की तरह परेशान रथाधीश पर कभी रफाल, तो कभी सीबीआई, तो कभी एससी-एसटी एक्ट के गोले बना-बनाकर फेंक रहा है।’
मैंने कहा, ‘ऐसे में तो भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल है हाजी। उधर बुआ-बबुआ इकठ्ठे हो गए, इधर कांग्रेस ने तो लगता है संजीवनी सूंघ ली है। शिव सेना ने तो लंबी वाली जीभ चिढ़ा दी। अब?’ हाजी बोले, ‘अब ये सिल्वर लाइनिंग इन द क्लाउड ढूंढ रहे हैं महाकवि- डूबते को तिनके का सहारा। हद तो ये है कि कल एक भाजपाई पूरे कॉन्फिडेंस से बोल रहा था कि देख लेना ममता दीदी हमारे साथ आएंगी।
मैंने पूछा कि ऐसा क्यों लगता है, तो बोला कि कल दीदी ने कहा कि सीबीआई मामले में मोदी जी ने लक्ष्मण रेखा पार कर ली है। लक्ष्मण का नाम लेकर ममता दीदी निश्चित रूप से राम मंदिर मामले में हमारा साथ देने का इशारा दे रही हैं।’ मैंने हंसी और आश्चर्य के मिश्रित भाव में पूछा, ‘हें! ये कौन सी बात हुई?’ हाजी भी हंसे। बोले, ‘ऐसा है महाकवि! जहां लॉजिक ख़त्म होता है, वहां से मैजिक शुरू हो जाता है। तो अब भाई साहब मैजिक की तलाश में हैं। उम्मीद पर दुनिया क़ायम है। बक़ौल हबीब सिद्दीक़ी,
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